1925 आते-आते आज़ादी की लड़ाई लड़ रहे क्रांतिकारियों की माली हालत ख़राब हो चुकी थी. वो पाई-पाई के मोहताज हो चुके थे. फिर उन्होंने सोचा कि अगर लूटना है तो सरकारी ख़ज़ाना क्यों न लूटा जाए. ऐसे में काकोरी ट्रेन लूट को अंजाम दिया गया. ‘विवेचना’ में जानिए पूरी कहानी.BBC News हिंदी
